नई दिल्ली: वो कहते हैं न कि हाथी खरीदने से ज्यादा हाथी पालना कठिन होता है। ये कहावत कारों के मामले में एकदम ठीक बैठती हैं। कार खरीदने के बाद कार चलाने काखर्च कई बार हमारे कार चलाने के शौक पर पाबंदियां लगा देता है। कई बार तो कार गैराज से बाहर निकालने से पहले आप कैलकुलेट करने लगते हैं कि आखिर इसका एवरेज पब्लिक ट्रांसपोर्ट से ज्यादा आएगा या कम। अगर आप भी ऐसा करते हैं तो हमारे पास आपके लिए एक बेहतरीन सॉल्युशन है। उस एक चीज को लगाने से आपका कार चलाने का खर्च आधे से भी कम हो जाएगा।
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दरअसल रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाइवे मिनिस्ट्री द्वारा हाल ही में जारी अधिसूचना में मोटर व्हीकल्स एक्ट 1989 में संशोधन करने की बात कही गई है। इस अधिसूचना के तहत मौजूदा व्हीकल्स में हाइब्रिड या इलेक्ट्रिक सिस्टम के रेट्रो फिटमेंट को मंजूरी देने की बात कही है। ये काम सिर्फ ऑथराइज्ड वर्कशॉप्स द्वारा किया जाएगा।इसके अलावा इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड किट मैन्युफैक्चरर्स या सप्लायर्स को सरकार की ओर से मान्यता प्राप्त टेस्टिंग एजेंसी सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होगा।
बता दें, पेट्रोल और डीजल वाहनों में हाइब्रिड सिस्टम लगाने के बाद कार चलाने का खर्च 50 फीसदी से भी कम हो सकता है।
कुछ टेक्निकल कंपनियां कारों में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की जगह इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड मोटर्स लगाने पर काम कर रही हैं।इसके अलावा कारों में बैटरी भी फिट की जाती है, जिसे रेट्रोफिटिंग भी कहा जाता है। इसके बाद आपकी कार पेट्रोल या डीजल इंजन के बदले इलेक्ट्रिक पावरट्रेन से चल सकेगी।
KPIT टेक्नोलॉजी ने इसके लिए रेवोलो नाम का प्रोडक्ट बनाया है। इस सिस्टम में एक इलेक्ट्रिक मोटर रहती है जिसे इंजन फैन बेल्ट से कनेक्ट करते हैं। इसी को लिथियम आयन बैटरी से भी जोड़ा जाता है, जिसके बाद आसानी से चार्ज किया जा सके। इलेक्ट्रिक मोटर पेट्रोल या डीजल इंजन के क्रैंकशाफ्ट में पावर जनरेट करता है, जिससे फ्यूल एफिशियंसी 35 फीसद तक बढ़ जाती है और एमिशन में 30 फीसद की कमी आती है। इस सिस्टम को लगाने से कार चलाने का खर्च 60 फीसद तक कम हो सकता है।
खर्च-ये सिस्टम कार में लगाने के लिए आपको 80हजार से लेकर 1 लाख तक रूपए खर्च करने पड़ सकते हैं।
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